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Shirley Abraham Speaks To Dainik Bhaskar, Selected from Bhopal for Oscar jury | ऑस्कर के लिए पहली बार भोपाल से चुनी गईं फिल्म मेकर शर्ली अब्राहम, बोलीं- मुझे लगा दोस्त मजाक कर रहे हैं

  • ऑस्कर ने इस बार दुनियाभर से 800 से अधिक फिल्म प्रोफेशनल्स को सदस्यता ऑफर की है
  • बताया- ऑस्कर से फोन आया और उन्होंने मुझसे मेरी स्वीकृति के बारे में पूछा, मैंने हां कर दी

दैनिक भास्कर

Jul 08, 2020, 02:33 PM IST

भोपाल. एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (एएमपास) अमेरिका ने खुद को व्यापक और अधिक विविधता पूर्ण प्रतिनिधित्व देने के लिए 68 देशों में 800 से अधिक फिल्म प्रोफेशनल्स को सदस्यता ऑफर की है। अकादमी को अपने वार्षिक पुरस्कारों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। ये ‘द ऑस्कर’ के नाम से पूरी दुनिया में लोकप्रिय है। 

नए आमंत्रितों सदस्यों में हॉलीवुड और बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हैं, जिनमें कई भारतीय फिल्म पेशेवर भी शामिल हैं। इसमें भोपाल की डॉक्युमेंट्री फिल्ममेकर शर्ली अब्राहम के साथ अमित महादेसिया और निष्ठा जैन शामिल हैं। इसी सूची में आलिया भट्ट और ऋतिक रोशन को भी नामांकित किया जा चुका है। ऑस्कर तक पहुंचने वाली शर्ली अब्राहम ने दैनिक भास्कर से अपने सफर पर बातचीत की… 

मजाक लगी थी सिलेक्शन की बात
शर्ली बताती हैं कि, 1 जुलाई की रात 3 बजे मेरी एक जर्नलिस्ट फ्रेंड ने मुझे ऑस्कर ज्यूरी की लिस्ट फॉरवर्ड की, जिसमें मेरा नाम था। साथ में, उसने बधाई संदेश लिखा था। मुझे लगा, लॉकडाउन में सबके पास समय अधिक है, दोस्त ने मेरे साथ कोई मजाक किया है। सच्चाई का अहसास तब हुआ जब सचमुच मुझे ऑस्कर से फोन आया और उन्होंनें मुझसे मेरी स्वीकृति के बारे में पूछा। इस पर मैंने उन्हें अपनी सहमति दे दी है। 

खुद के लिए चुनी मुश्किल राह
उनकी प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री द सिनेमा ट्रैवलर्स है। जिसे कांस, न्यूयार्क और टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में नॉमिनेशन मिल चुका है। इसके साथ ही इस फिल्म को नेशनल अवार्ड प्रेसीडेंट गोल्ड मेडल भी मिला है। उन्होंने अमित महादेसिया के साथ दो और फिल्मों का डायरेक्शन किया है। इसमें हैं- सर्चिंग फॉर सरस्वती, द आर ऑफ लिंचिंग। इन फिल्मों के लिए भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ते ही सभी ने यही सलाह दी कि, अगर बड़ा फिल्म मेकर बनना है तो बड़े बैनर्स के साथ काम करना चाहिए। मेरे लिए फिल्म मेकिंग हमेशा से मेरे अंदर से आई है और इसीलिए मैंने इन्डिपेंडेंट्ली ही काम किया है। यह काफी मुश्किल था लेकिन, अब यकीन हो गया कि मेहनत का परिणाम मीठा ही होगा।


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